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हिंदी काव्य और स्वतंत्रता संग्राम-विचार मंथन


इंडिक टुडे रविवार २ अगस्त को हिंदी कविता,  हिंदी काव्य और स्वतंत्रता संग्राम इस विषय पर फेसबुक लाइव के द्वारा विचार मंथन प्रस्तुत करेंगे | करीबन सन १८५० से १९४७ का काल भारत के इतिहास में एक लंबा संग्राम हैं जहाँ भारत के हर व्यक्ति ने इस में भाग लिया |  शब्द भाव को प्रतीत करते हैं प्रेरणा देते हैं |
इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले वक्ता और उनकी जानकारी इस प्रकार हैं |

सुमेधा वर्मा, लेखक, स्तंभकार और वक्ता, पटना में पैदा हुईं और बिहार और झारखंड में स्कूल गईं।
उन्होंने अर्थशास्त्र (लेडी श्रीराम कॉलेज) में स्नातक किया और दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र (दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स) में स्नातकोत्तर किया।
वह 1992 में भारतीय सिविल सेवा में शामिल हुईं लेकिन 2006 में एक विश्राम के बाद करियर बदल दिया। तब से वह प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृत और प्राकृत कार्यों पर गहन शोध में लगी हुई हैं। उसने चाणक्य के अस्त्रशास्त्र पर आधारित मौर्य काल में एक पुस्तक पर शोध और लेखन किया। यह अब एक पुस्तक श्रृंखला है। सुमेधा महाकाव्यों के अनुवाद और व्याख्या के क्षेत्र में काम करती है और प्राचीन संस्कृत / प्राकृत साहित्य को आधुनिक दुनिया के साथ-साथ प्राचीन भारत के लिंग विश्लेषण के क्षेत्र में भी लाती है। 2016 में संस्कृत वाल्मीकि रामायण का अनुवाद प्रकाशित हुआ था। वह प्राचीन भारत की महिलाओं पर एक किताब लिखने में लगी हुई है जो उपमहाद्वीप की परंपराओं के आधार पर महिलाओं को समझने के लिए एक नया दृष्टिकोण स्थापित करेगी।
वह मौखिक परंपराओं की अमूर्त विरासत पर ध्यान देने के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में भी काम करती है। लॉस एंजिल्स पुस्तकालय प्रणाली ने उसे एक लेखक और उसके दक्षिण एशियाई आउटरीच के हिस्से के रूप में मान्यता दी है। उन्होंने हाल ही में उदयपुर में मेवाड़ के हाउस द्वारा आयोजित चौथे अंतर्राष्ट्रीय विश्व लिविंग हेरिटेज सम्मेलन में विरासत संरक्षण के लिए एक इंडिक दृष्टिकोण को औपचारिक बनाने में योगदान दिया। भारत में IGNCA, नेशनल म्यूजियम और अन्य संग्रहालय उन्हें भारतीय इतिहास और संस्कृति पर बातचीत के लिए एक विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित करते हैं और एक पेपर को इसके प्रोजेक्ट मौसम एंथोलॉजी में प्रकाशित किया जा रहा है। वह कई अखबारों और पत्रिकाओं में इतिहास और संस्कृति पर लेखों का योगदान करती है, जिनमें स्वराज्य, MyIndmakers, Indiafacts, Indian Express, Times of India आदि शामिल हैं और प्राचीन भारतीय इतिहास में इनपुट प्रदान करने वाली मीडिया सलाहकार के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा, वह अपनी शर्तों पर भारतीय समाज की स्पष्ट समझ के अधीन लाने के लिए स्नातक स्तर पर इंडिक सोशियोलॉजी पर पाठ्यक्रम पढ़ाती है। वह मौर्य काल के भारत पर वेब श्रृंखला मौर्यलोक की निर्माता हैं। (एक नौकरशाह के रूप में, वह संयुक्त राष्ट्र संगठनों के साथ एक अंतरराष्ट्रीय सलाहकार भी हैं, जैसे अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, खाद्य और कृषि संगठन और वित्त, कराधान, लेखा परीक्षा और प्रबंधन के क्षेत्रों में GFTAM) वह अपने पति के साथ जिनेवा में रहती हैं और उनके दो बच्चे अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी कर रहे हैं।
प्रकाशित पुस्तकें:
उर्नाभि (2014 रोली बुक्स)
रामायण (2016 रोली बुक्स)
आगामी पुस्तकें
उर्नाभि बुक 2 (2020 रोली बुक्स)
प्राचीन भारत की ‘आधुनिक’ महिलाएं (2020 रोली बुक्स)
सर्वेश की रुचि हिन्दू इतिहास एवं संस्कृति से जुडे विषयों में है, जिन पर इनका पठन-पाठन लेखन-आख्यान चलता रहता है। भारतीय भाषाओं और साहित्य के ऐतिहासिक पक्ष पर और भिन्न भाषाओं के काव्य रूपान्तर में इनकी विशेष रुचि है।
बिहार में जन्मे कुशाग्र अनिकेत आज-कल न्यू यॉर्क में एक अर्थशास्त्र और प्रबंधन सलाहकार (consultant) के रूप में कार्यरत हैं। कुशाग्र ने अर्थशास्त्र, गणित, और सांख्यिकी में स्नातक की शिक्षा न्यू यॉर्क के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से पूरी की, जहाँ उन्हें विश्वविद्यालय के सर्वोच्च सम्मान से पुरस्कृत किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय में दो वर्षों तक भारतीय दर्शनशास्त्र और संस्कृत-पाण्डुलिपियों का भी अध्ययन किया। अब वे कोलंबिया विश्वविद्यालय से वित्तीय प्रबंधन की शिक्षा पूरी कर रहें। कुशाग्र तीन भाषाओं (अंग्रेज़ी, हिंदी, एवं संस्कृत) में अपने गद्य और पद्य लेखन के लिए भारत और सयुंक्त राज्य में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत में विशारद की उपाधि भी प्राप्त की है।

अवतंस एक समीक्षक, स्तम्भकार, और कवि हैं. अवतंस के भाषा, संस्कृति, राजनीती, और भारत की ज्ञान-विज्ञान की परम्परा से सम्बंधित लेख भारत और अमेरिका के जान-माने समाचारपत्रों और पत्रिकाओं में प्रायः प्रकाशित होते रहते हैं.  मूलतः पटना निवासी अवतंस की स्नातकोत्तर शिक्षा भारत के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलिनॉय में हुई. अमेरिका में अवतंस ने कई वर्षों तक विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाने का काम भी किया. सम्प्रति, अवतंस इंडिक अकादेमी की अमेरिकी शाखा इंडिका की देख-रेख और सञ्चालन का काम करते हैं. 

 


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