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Book Launch: JIWAN KA GANIT by Abhinav Shankar ‘Anikul’


Book: Jiwan Ka Ganit
Poet: Abhinav Shankar ‘Anikul’
Date:
 25th March
Time: 3 PM
Venue: Lecture Hall, JNU Convention Center
Poet: Abhinav Shankar ‘Anikul’

Description

पेशे से इंजीनियर लेखक ने जब जिंदगी को कागज़ पर  उतारने की ठानी तो शब्दों के जो समीकरण बनें ,  भावों का जो मानकीकरण हुआ और उससे जीवन का  जो गणित उभरा– ये रचनायें उस गणित की ‘प्रमेय‘ हैं। रचनायें जो जीवन के नैराश्य को भी साहित्य के रंग  में भर मनोरम बना देती हैं और जीवन के उत्सव को  अप्रीतम! रचनायें जो कल्पना का चित्रण  करते हुए उसेयथार्थ से ज्यादा विश्वसनीय बना  देती हैं और यथार्थ का चित्रण करते हुए उसे कल्पना  से अधिक अकल्पनीय !! रचनाएँ जो न केवल परिस्थितियों  और उसमें न्यस्त विडंबनाओं का वर्णन  करती हैं बल्कि आप इनमें सुदीर्घ चिंतन की एक  ऐसी अंतर्धारा का सहज बोध करेंगे जो अंततोगत्वा  आपका साक्षात्कार जीवन के एक सत्य, एक सुचिंतित जीवन–दर्शन से कराएंगी।

कुल तीन खण्डों में बंटी इन रचनाओं (1.दुनियावी 2. रूमानी और 3. रूहानी) में ज्यादातर कविताएं ‘दुनियावी‘हिस्से की हैं पर ‘रूमानी‘ और ‘रूहानी‘ खण्डों में जो थोड़ी कविताएं आई हैं वह भी अपनी–अपनी श्रेणी में विलक्षण अन्तर्दृष्टियों की अभिव्यक्तियां हैं| इस रचना संग्रह में “झलकियां” खंड के तहत आगामी उपन्यास के कुछ अंश भी दिए गए हैं. पूरी तरह रूमानियत में डूबे इन अंशों को पढ़ते समय आपको महसूस होगा कि गद्य में होने के बावजूद ये रचनाएं एक ‘पोएटिक रोमांटिसिज़्म‘ ली हुई हैं. पद्य में ऐसी गंभीरता और दार्शनिकता के बाद गद्य में ऐसी रूमानियत सुखद आश्चर्य से भर देती है. साथ ही लेखक की लेखनी की विविधतापूर्ण संभावनाओं को लेकर हिंदी जगत को आश्वस्त भी करती है | कुल 120 पृष्ठों के इस काव्य–संग्रह का प्रकाशन नोशन प्रेस, चेन्नई द्वारा किया गया है. ये पुस्तक अमेज़न, फ्लिपकार्ट और इन्फिबीम पर उपलब्ध है. ये पुस्तक अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में भी अमेज़न पर उपलब्ध है | आज के दौर से कदम–ताल मिलते हुए ये काव्य–संग्रह इ–बुक संस्करण पर भी अमेज़न किंडल, गूगल बुक्स, i-बुक्स, पर उपलब्ध है |


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