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तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक- सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -४

चलिए, अब हम तंत्र-युक्ति सिद्धांत के चौथे मुख्य विशेषता पर विचार करेंगे जो कहता है कि तन्त्रयुक्ति को ग्रन्थ की आवश्यकताओं के अनुसार अपनाया जा सकता है।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक- सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -३

चर्चा करते हैं की कैसे तन्त्रयुक्ति का अखिल भारतीय प्रसार था। हम यह भी देखेंगे कि कैसे तन्त्रयुक्ति में एक व्यवस्थित ग्रन्थ की संरचना के लिए सभी मूलभूत पहलू शामिल हैं।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक-सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -२

तन्त्रयुक्तियों की रचना की अवधि संभवतः सामान्य युग के पेहले, छठी शताब्दी की है। विभिन्न अवधियों और विषयों से संबंधित ग्रंथों ने इन युक्तियों का उपयोग किया है।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक-सैद्धान्तिकग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -१

यह प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ग्रंथों के बारे में ज्ञान की स्थिति है। कम ज्ञात तथ्य यह है कि भारत में वैज्ञानिक और सैद्धांतिक ग्रंथों के निर्माण के लिए एक पद्धति थी। यह तन्त्रयुक्ति का पद्धति है।

Charaka- The Wandering Monk Ayurveda

Charaka – A Wandering Monk

Dr. Bhavana Raghavendra talks about the Charaka Samhita as a travelogue of Sage Charaka, a Wandering Monk. The paper was presented at the Yatra Conference jointly organized by Indic Academy and Bharat Adhyayan Kendra, BHU, at BHU, Varanasi during 15th-17th November, 2019.