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अनाम कला का रहस्य- भाग-३

आधुनिक पश्चिम में कला ‘व्यक्ति’ और ‘व्यक्तिगत नवीनता’ पर टिकी हुई है। इसे केवल व्यक्ति के नाम से ही जाना जाता है। आधुनिक कला में कलाकार ही सर्वोच्च है।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनछुए पक्ष- पात्र या घटनाएं

हर्ष का विषय है कि भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं लोकाचार के मार्ग का निर्वाहन करते हुए इंडिक अकादमी भारतीय इतिहास की ओर भी अग्रसर है। इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए हम आपके समक्ष प्रस्तुत करने वाले हैं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनछुए पक्ष।

अनाम कला का रहस्य- भाग-२

जिन अद्भुत हाथों ने अप्रतिम एलोरा, कांचीपुरम, खजुराहो, कोणार्क या मोढ़ेरा को रचा है, हमें उनके नाम ज्ञात हैं?

अनाम कला का रहस्य- भाग-१

क्या आपने कभी जानने की चेष्टा की कि मूर्ति पर कलाकार के हस्ताक्षर कहाँ है? मंदिर पर वास्तुकार का नाम कहाँ है? कला में स्थित कलाकार कहाँ है? ये कुछ अज्ञात से प्रश्न हैं।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक- सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -४

चलिए, अब हम तंत्र-युक्ति सिद्धांत के चौथे मुख्य विशेषता पर विचार करेंगे जो कहता है कि तन्त्रयुक्ति को ग्रन्थ की आवश्यकताओं के अनुसार अपनाया जा सकता है।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक- सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -३

चर्चा करते हैं की कैसे तन्त्रयुक्ति का अखिल भारतीय प्रसार था। हम यह भी देखेंगे कि कैसे तन्त्रयुक्ति में एक व्यवस्थित ग्रन्थ की संरचना के लिए सभी मूलभूत पहलू शामिल हैं।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक-सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -२

तन्त्रयुक्तियों की रचना की अवधि संभवतः सामान्य युग के पेहले, छठी शताब्दी की है। विभिन्न अवधियों और विषयों से संबंधित ग्रंथों ने इन युक्तियों का उपयोग किया है।

गीतायन – एक अनूठा प्रयोग

श्रीमद् भगवद्गीता के परिपेक्ष में लिखे गए लेखों की शृंखला “गीतायन” के लेखक श्री आनन्द कुमार जी से चर्चा कर रहे हैं मनीष श्रीवास्तव।