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गर्भविज्ञान परिचय

सभी विज्ञानों का मूल विज्ञान – जिस पर पूरी मानव जाति का विकास आधारित है – वह गर्भविज्ञान है। व्यक्ति की योग्यता (potential) के सबसे अधिक विकास का काल गर्भकाल है। भारतीय ऋषियों ने गर्भ विज्ञान में बहुत चिरंतन सत्यों की प्राप्ति करी है।

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भारतीय सांस्कृतिक विचारधारा – भाग २

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में इतिहास से ही भारत का अतुलनीय योगदान रहा है। प्राचीन काल से ही भारत साधुओं एवं द्रष्टाओं के साथ साथ विद्वानों एवं वैज्ञानिकों की भी भूमि रही है। आयुर्वेद के प्राचीन विज्ञान का मूलभूत पाठ महर्षि चरक द्वारा चरकसंहिता में लिखा गया। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में महर्षि सुश्रुत की देन भी अतुलनीय है।