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सुता चली ससुराल! – भाग ४

परिवार, पीढ़ी और अंततः संस्कृति सहज और सुचारू रूप से कैसे चले? “सुता चली ससुराल” के अंतिम भाग में में चर्चा कर रही हैं

शंकराचार्य

सौन्दर्यलहरी – सांस्कृतिक विमर्श

शिखरिणी छन्द में आदि शंकराचार्य ने सौंदर्यलहरी की रचना की थी। संस्कृत जानने वालों के लिए, शाक्त उपासकों के लिए या तंत्र की साधना करने वालों के लिए सौन्दर्यलहरी कितना महत्वपूर्ण ग्रन्थ है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी पैंतीस से अधिक टीकाएँ, केवल संस्कृत में हैं।

महाभारत – पृष्ठभूमि तथा परिपेक्ष्य

महाभारत में श्री गणेश जी की भूमिका अत्यधिक प्रसिद्ध है। इसके रचयिता श्री व्यास जी एवं लिपिकार श्री गणेश द्वारा की गयी चर्चा महाभारत के सबसे प्रसिद्ध अध्यायों में से…