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हिन्दू मंदिरों में शिव – भाग १०: ब्रह्मशिरच्छेदक मूर्ति

शिव ने उद्दंड ब्रह्माजी को बोधपाठ पढ़ाने हेतु भैरव का आह्वान किया और विक्राल रुप धारण किए भैरव ने अपने नाखून से ब्रह्माजी का पांचवा अहंकारी मस्तक धड़ से अलग कर दिया।

हिन्दू मंदिरों में शिव – 9 – काल संहार मूर्ति

इस कथा में शिव यम का अंत करते हैं। यहां यम एक पात्र मात्र नहीं हैं, यहां यम को काल के स्वरुप में प्रस्तुत किया गया है। काल का अंत होने का अर्थ है समय का अंत, समय का अंत मतलब जन्म, मृत्यु, जरा एवं व्याधि सब का अंत। सरल शब्दों में कहें तो शिव काल को समाप्त कर के अपने भक्तों के जन्म-मृत्यु का चक्र समाप्त कर देते हैं।

हिन्दू मंदिरों में शिव – 7 – रावणानुग्रह मूर्ति

कैलाश पर्वत पर आह्लादक कर देने वाली ऋतु थी। अनन्त प्रतीक्षा के प्रतीक नंदी महाराज पर्वत की कंदराओं में विचरण कर रहे थे तभी बड़े धमाके से उस प्रदेश में कुछ आ गिरा। शान्त रमणीय स्थल पर अचानक हुए इस कोलाहल से आश्चर्यचकित नन्दी महाराज (नंदिकेश्वर) वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक बड़ा सा खेचरी यांत्रिक वाहन वहां पड़ा हुआ था और उसका चालक उसे वापस हवा में उड़ाने का निरर्थक प्रयास कर रहा था।