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आयुर्वेद

भारतीय संस्कृति व चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद का महत्व – भाग १

आयुर्वेद संपूर्ण प्राणी जगत के लिए उसकी आयु का रक्षा शास्त्र है। यह मानव के सम्पूर्ण मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की बात करता हैं। साथ ही आयुर्वेद में स्पष्ट उल्लेख है कि मानव को अपनी व बाह्य प्रकृति से सामजंस्य बनाकर ही अपना जीवनयापन करना चाहिए।

प्राचीन भारतीय विज्ञान – भाग २

माहवारी के समय महिलाओं को अलग रखना, बांझ स्त्रियों को एक बरगद के पेड़ की परिक्रमा करवाना, चौमासे के समय विवाह या किसी अन्य शुभ कार्य को न करना – क्या ऐसे अंधविश्वास हमें अज्ञानता की ओर नहीं धकेलते?

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प्राचीन भारतीय विज्ञान – भाग १

क्या आप जानते हैं कि कई मंदिरों में, जहाँ भगवान को मीठे दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की परंपराएँ हैं, वहाँ दूध को पहले उबालना होता है? ऐसा क्यूँ है?

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भारतीय सांस्कृतिक विचारधारा – भाग १

विज्ञान का क्षेत्र हो या राजनितिक या कलात्मक, भारतीय संस्कृति सदैव से हर क्षेत्र में अग्रणी रही है। इसी ऐतिहासिक सांस्कृतिक विचारधारा ने भारत को आज भी समस्त विश्व में एक परिचय एवं नाम दिया है, जिसके कारण हमारे राष्ट्र को कला, विज्ञान, राजनीती एवं कई अन्य विषयों की जननी माना जाता है।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक- सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -४

चलिए, अब हम तंत्र-युक्ति सिद्धांत के चौथे मुख्य विशेषता पर विचार करेंगे जो कहता है कि तन्त्रयुक्ति को ग्रन्थ की आवश्यकताओं के अनुसार अपनाया जा सकता है।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक- सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -३

चर्चा करते हैं की कैसे तन्त्रयुक्ति का अखिल भारतीय प्रसार था। हम यह भी देखेंगे कि कैसे तन्त्रयुक्ति में एक व्यवस्थित ग्रन्थ की संरचना के लिए सभी मूलभूत पहलू शामिल हैं।

तन्त्रयुक्ति- एक प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक-सैद्धान्तिक ग्रन्थ निर्माण पद्धति- भाग -२

तन्त्रयुक्तियों की रचना की अवधि संभवतः सामान्य युग के पेहले, छठी शताब्दी की है। विभिन्न अवधियों और विषयों से संबंधित ग्रंथों ने इन युक्तियों का उपयोग किया है।