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शंकराचार्य

भारतवर्ष की प्राचीन गुरुकुल प्रणाली – भाग ३

अंग्रेज विद्वान एलफिंस्टन ने सन् १८२४ में शिक्षा पर अपनी रिपोर्ट में स्पष्टतः भारतीयों के लिए भारतीय भाषाओं व शिक्षा व्यवस्था पर बल दिया था। लेकिन ग्रांट, वार्डन और मैकॉले जैसे अंग्रेज अधिकारी भारतीय जनता के हितचिंतक नहीं थे। इसलिए इन्होंने एलफिंस्टन के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

ram vashishtha

भारतवर्ष की प्राचीन गुरुकुल प्रणाली – भाग २

प्राचीनकाल में धौम्य, च्यवन ऋषि, द्रोणाचार्य, सांदीपनि(उज्जैन), वशिष्ठ, विश्वामित्र, वाल्मीकि, गौतम, भारद्वाज आदि ऋषियों के आश्रम प्रसिद्ध थे। बौद्धकाल में बुद्ध, महावीर व शंकराचार्य की परंपरा से जुड़े गुरुकुल जगप्रसिद्ध थे, जहां विश्वभर से मुमुक्षु ज्ञान प्राप्त करने आते थे तथा जहां गणित, ज्योतिष, खगोल, विज्ञान, भौतिक आदि सभी तरह की शिक्षा दी जाती थी।

कृष्णा सुदामा

भारतवर्ष की प्राचीन गुरुकुल प्रणाली – भाग १

प्राचीन भारतीय काल में अध्ययन अध्यापन के प्रधान केंद्र गुरुकुल हुआ करते थे, जहाँ दूर-दूर से ब्रह्मचारी विद्यार्थी, अथवा सत्यान्वेषी परिव्राजक अपनी अपनी शिक्षाओं को पूर्ण करने जाते थे। वे गुरुकुल छोटे अथवा बड़े सभी प्रकार के होते थे।