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सामाजिक परिप्रेक्ष्य में श्रीमद्भगवत गीता का महत्व- मालिनी अवस्थी जी के साथ


गीता में अपने मन पर नियंत्रण को बहुत ही अहम माना गया है। अक्सर हमारे दुखों का कारण मन ही होता है। वह अनावश्यक और निरर्थक इच्छाओं को जन्म देता है, और जब वे इच्छाएं पूरी नहीं हो पाती तो वह आपको विचलित करता है। इसी कारण जीवन में जिन लक्ष्यों को आप पाना चाहते हैं, जैसा व्यक्तित्व अपनाना चाहते हैं उससे दूर होते चले जाते हैं।

लेकिन हम आपको आज जिन से परिचय करा रहे हैं उन्होंने अपने लक्ष्य को हमेशा सामने रखा। एक बेटी, पत्नी और मां का फर्ज़ निभाने के साथ-साथ अपने शौक़ को भी सजाया संवारा और भारतीय संगीत में अपना एक अलग स्थान बनाया।

इंडिक टुडे प्रस्तुत करता है श्रीमद्भगवत गीता और सामाजिक जीवन का समन्वय, श्रीमती मालिनी अवस्थी जी द्वारा।
उनके साथ बातचीत कर रहे हैं “मैं मुन्ना हूं” और “रूही एक पहेली” उपन्यासों के लेखक श्री मनीष श्रीवास्तव।


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