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चिकित्सा

भारतीय संस्कृति व चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद का महत्व – भाग २

आयुर्वेद रोग के उपचार से ज्यादा अनुसाशनात्मक जीवन की बात करता है। यदि कोई वैद्य के पास जाता है तो उसे न केवल दवा दी जाती है बल्कि कुछ मंत्र भी दिया जाता है जैसे- भोजन करें आराम से, सब चिंता को मार।

आयुर्वेद

भारतीय संस्कृति व चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद का महत्व – भाग १

आयुर्वेद संपूर्ण प्राणी जगत के लिए उसकी आयु का रक्षा शास्त्र है। यह मानव के सम्पूर्ण मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की बात करता हैं। साथ ही आयुर्वेद में स्पष्ट उल्लेख है कि मानव को अपनी व बाह्य प्रकृति से सामजंस्य बनाकर ही अपना जीवनयापन करना चाहिए।

मुद्रिकाप्रसंग

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने अनेक प्रसंगों को बहुत ही गूढ़ रूप से लिखा है और कई प्रसंगों को केवल छुआ मात्र है, उनका विस्तृत उल्लेख नहीं किया है। ऐसा ही एक प्रसंग मुद्रिकाप्रसंग है

शंकराचार्य

सौन्दर्यलहरी – सांस्कृतिक विमर्श

शिखरिणी छन्द में आदि शंकराचार्य ने सौंदर्यलहरी की रचना की थी। संस्कृत जानने वालों के लिए, शाक्त उपासकों के लिए या तंत्र की साधना करने वालों के लिए सौन्दर्यलहरी कितना महत्वपूर्ण ग्रन्थ है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी पैंतीस से अधिक टीकाएँ, केवल संस्कृत में हैं।

bhairav shiva

हिन्दू मंदिरों में शिव – भाग १०: ब्रह्मशिरच्छेदक मूर्ति

शिव ने उद्दंड ब्रह्माजी को बोधपाठ पढ़ाने हेतु भैरव का आह्वान किया और विक्राल रुप धारण किए भैरव ने अपने नाखून से ब्रह्माजी का पांचवा अहंकारी मस्तक धड़ से अलग कर दिया।

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रामनवमी महिमा – भाग ३

आज ही के दिन यानि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को प्रभु ने पृथ्वी का भार हरने और प्रजाजन के कष्ट निवारण के लिए पृथ्वी पर अवतरण लिया था।

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रामनवमी महिमा – भाग २

ब्रह्मा जी ने देवताओं और गौ रूप में आयीं देवी पृथ्वी जी से कहा, आप सब मेरे साथ प्रेम पूर्वक प्रभु जी का स्मरण करें, जिसके हृदय में जैसी भक्ति होती है प्रभु उसी रीती से वहाँ सदैव प्रकट रहते हैं। वे ही प्रभु भुभारहारी जिनकी भक्ति शिवजी और विष्णु जी भी करते हैं।

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रामनवमी महिमा – भाग १

चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से सृष्टि की रचना आरंभ हुई, जिसे सनातन धर्म को मानने वाले नव वर्ष के रूप में मनाते हैं।