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परम्परा और धर्म

जबतक शिकार के किस्से शेर अपने पक्ष से सुनाना नहीं शुरू करते, तबतक शिकार की कहानियों में शिकारी का महिमामंडन होता रहेगा। पढ़िए परंपरा और धर्म के सन्दर्भ में आनंद कुमार जी को

गणपति

ज्ञानेश्वर गणेश

संत ज्ञानेश्वर ने ज्ञानेश्वरी गीता के आरम्भ में गणेश प्रतिमा के गुणों का दार्शनिक वर्णन किया है, इसी वर्णन के आधार पर हमारे मन में निरंतर चलते द्वंद और दुविधाओं का निराकरण ढूंढने का प्रयास करती एक कथा।

वरलक्ष्मी व्रतकथा

श्रावण मास की शोभा से संपूर्ण शिवालय जगमग था। कार्तिकेय और विनायक शिव के समीप बैठ इस अद्भुत रस से सराबोर हो रहे थे। मस्तक पर स्थापित माँ गंगा शीतल मंद स्मित लिए शिवमय हो रही थीं। प्रकृति ने भी स्वयं शिवस्वरूप रमा लिया था कि तभी माता पार्वती का प्रवेश होता है।

सुता चली ससुराल! – भाग ४

परिवार, पीढ़ी और अंततः संस्कृति सहज और सुचारू रूप से कैसे चले? “सुता चली ससुराल” के अंतिम भाग में में चर्चा कर रही हैं

कहानी स्वतंत्रता से एक वर्ष पूर्व की – भाग २

१५ अगस्त की आधी रात से मुसलमानों की संगठित टोलियां तरह तरह के हथियार लिए कलकत्ते के मार्गों पर घुमती दिखाई दी। उनके लड़ाई के नारों से रात की शांति भंग हो रही थी।

विवाह

सुता चली ससुराल! – भाग ३

स्त्री के अनेकों नाम में से ‘योषा’ और ‘मानिनी’ के क्या मायने हैं?  “सुता चली ससुराल” में चर्चा कर रही हैं अंशु दुबे

भारतीय विवाह

सुता चली ससुराल! – भाग १

विवाह करके लड़कियों को ही पति के घर क्यों जाना होता है ? “सुता चली ससुराल” लेखमाला के प्रथम भाग में इसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा कर रही हैं अंशु दुबे।

kapil

मातृ तीर्थ: सिद्धपुर – भाग ४

माता देवहुति जी ने संसार की सभी स्त्रीयों के कल्याण एवं मुक्ति के लिए जिन प्रश्नों को भगवान कपिल जी से पूछा तथा उनके उत्तर पाए, वे अध्यात्म ज्ञान के तत्त्व कल्याणकारी एवं जानने योग्य हैं।