हिन्दू मंदिरों में शिव – 7 – रावणानुग्रह मूर्ति

कैलाश पर्वत पर आह्लादक कर देने वाली ऋतु थी। अनन्त प्रतीक्षा के प्रतीक नंदी महाराज पर्वत की कंदराओं में विचरण कर रहे थे तभी बड़े धमाके से उस प्रदेश में कुछ आ गिरा। शान्त रमणीय स्थल पर अचानक हुए इस कोलाहल से आश्चर्यचकित नन्दी महाराज (नंदिकेश्वर) वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक बड़ा सा खेचरी यांत्रिक वाहन वहां पड़ा हुआ था और उसका चालक उसे वापस हवा में उड़ाने का निरर्थक प्रयास कर रहा था।

हिन्दू मंदिरों में शिव- भाग – ५-मानुष लिङ्ग परिचय

शैव सम्प्रदायों में लिङ्गार्चा का विशेष महत्त्व है। सामान्य जन के लिए स्वयम्भू लिङ्ग तथा ज्योतिर्लिंगों का दर्शन दुर्लभ है इसीलिए मानवसर्जित लिङ्गपूजा का प्रारम्भ हुआ। शिवालयों में स्थापित मानुष लिङ्गों के निर्माण, आकार तथा प्रतिष्ठा के भी विशेष विधान हैं। 

हिन्दू मंदिरों में शिव- भाग -४- स्थावर लिंगों का वर्गीकरण तथा स्वयंभू लिंग प्रतिमाएं

शिव के सभी स्वरूपों में सबसे प्रचलित एवं प्रख्यात भी लिंग प्रतिमाएं ही हैं लेकिन जब हम लिंग प्रतिमाओं के विषय में ज्यादा गहराई से जानने का प्रयास करते हैं तब कुछ अद्भुत एवं रहस्यमय तथ्य हमारे सामने प्रस्तुत होते हैं।

जरासंध, कालयवन, विश्वकर्मा और श्रीकृष्ण: महाभारत के महत्वपूर्ण उपदेश

महाभारत के इस महत्वपूर्ण उपदेश में हरिवंश से जुड़े कुछ प्रसंग देखते हैं। इनमें तीन लघुकथाएं हैं जो श्री कृष्ण, जरासंध, कालयवन, विश्वकर्मा और द्वारावती के बारे में हैं।

महाभारत सर्प सांप 

महाभारत तथा सर्प – एक विरल चित्ताकर्षक संबंध

महाभारत का वर्णन कैसे आरंभ होता है? चलिए, शुरू से शुरू करते हैं  – जनमेजय का सर्प-सत्र। इस सर्प यज्ञ का उद्देश्य तक्षक और उनके परिजनों का विनाश करना था। इस यज्ञ से संपूर्ण नागवंश के अस्तित्व का विनाश होने का भय था।