महाराज पांडु

महाराज पांडु : कथा एक अभिशप्त जीवन की

महाभारत की अनेक कथाओं में से महाराजा पांडु की कथा, जहाँ उनको एक महर्षि द्वारा एक श्राप दिया जाता है, काफी प्रसिद्ध हैं। इस श्राप को महाभारत का एक महत्वपूर्ण केंद्रबिंदु समझा जाता है। इस श्राप के कारण ही महाराजा पांडु की मृत्यु हो जाती है तथा महाभारत कुरु राजकुमारों के बीच संघर्ष में डूब जाता है। तथापि इस प्रकरण में छिपे परिप्रेक्ष्य के बारे जनमानस को भलीभांति ज्ञात नहीं है।

Nahusha Bheema

Mahabharata Metaphors: King Nahusha – The Immense Fall and The Great Reformation

The larger goal of life must be renunciation and striving for Moksha. Nahusha rediscovers this emphasis for himself, eventually, in his conversation with Yudhishthira – in the discussion of who a genuine brahmana/sage is and the nature of the Parabrahma vastu. Thus, he sets himself firmly in the path of renunciation in the guidance he provides to the future that is Yudhishthira. Hence, he regains his divine form and the right to be back to the exalted worlds.

महाभारत – पृष्ठभूमि तथा परिपेक्ष्य

महाभारत में श्री गणेश जी की भूमिका अत्यधिक प्रसिद्ध है। इसके रचयिता श्री व्यास जी एवं लिपिकार श्री गणेश द्वारा की गयी चर्चा महाभारत के सबसे प्रसिद्ध अध्यायों में से…