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मातृ तीर्थ: सिद्धपुर – भाग ४

माता देवहुति जी ने संसार की सभी स्त्रीयों के कल्याण एवं मुक्ति के लिए जिन प्रश्नों को भगवान कपिल जी से पूछा तथा उनके उत्तर पाए, वे अध्यात्म ज्ञान के तत्त्व कल्याणकारी एवं जानने योग्य हैं।

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बिन्दुसरोवर तीर्थ: सिद्धपुर – भाग ३

कर्दम जी ने देखा कि उनके यहाँ साक्षात् देवाधिदेव श्री हरिने ही अवतार लिया है, तो वे एकांत में उनके पास गए और उन्हें प्रणाम करके इस प्रकार कहने लगे। प्रभो! आपकी कृपा से मैं तीनों ऋणों से मुक्त हो गया हूँ और मेरे सभी मनोरथ पूर्ण हो चुके हैं। अब मैं सन्यास मार्ग को ग्रहण कर आपका चिंतन करते हुए शोकरहित होकर विचरूँगा। आप समस्त प्रजाओं के स्वामी हैं, अतएव इसके लिए मैं आपकी आज्ञा चाहता हूँ।

कपिल मुनि

सिद्ध स्थल: सिद्धपुर – भाग २

सरस्वती के जल से भरा हुआ यह बिन्दुसरोवर वह स्थान है, जहाँ अपने शरणागत भक्त कर्दम के प्रति उत्पन्न हुई अत्यंत करुणा के वशीभूत हुए भगवान के नेत्रों से आँसुओं की बूंदे गिरी थीं।

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श्री स्थल सिद्धपुर – भाग १

महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म जी ने लक्ष्मी जी के निवास करने वाले स्थल के बारे में बताते हुए जो वृतांत कहा था, और उस वृतांत में जो माता लक्ष्मी जी ने देवी रुक्मणी जी से कहा, वह सभी इस श्री स्थल क्षेत्र में जहाँ भगवान कर्दम मुनि का आश्रम है और बिंदु सरोवर है स्थित है। इस कारण से इसका नाम श्री स्थल होना पुर्णतः उचित है

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रामनवमी महिमा – भाग ३

आज ही के दिन यानि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को प्रभु ने पृथ्वी का भार हरने और प्रजाजन के कष्ट निवारण के लिए पृथ्वी पर अवतरण लिया था।

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रामनवमी महिमा – भाग २

ब्रह्मा जी ने देवताओं और गौ रूप में आयीं देवी पृथ्वी जी से कहा, आप सब मेरे साथ प्रेम पूर्वक प्रभु जी का स्मरण करें, जिसके हृदय में जैसी भक्ति होती है प्रभु उसी रीती से वहाँ सदैव प्रकट रहते हैं। वे ही प्रभु भुभारहारी जिनकी भक्ति शिवजी और विष्णु जी भी करते हैं।

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रामनवमी महिमा – भाग १

चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से सृष्टि की रचना आरंभ हुई, जिसे सनातन धर्म को मानने वाले नव वर्ष के रूप में मनाते हैं।

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महाभारत- एक ज्ञानमय प्रदीप- भाग -२

महाभारत को केवल लड़ाई झगड़ों वाला ही ग्रंथ मान लेना एक बड़ी भूल है। समय समय पर अनेक विद्वान कवियों ने महाभारत की कथाओं से ही प्रेरणा लेकर अपने काव्यों की रचना की है। महाभारत इस भारत नामक राष्ट्र का हृदय है। अध्यात्म,धर्म तथा नीति की विशद विवेचना ने इस महाभारत को भारतीय धर्म तथा संस्कृति का विशाल विश्वकोश बनाया है।