garbvigyan

गर्भविज्ञान परिचय

सभी विज्ञानों का मूल विज्ञान – जिस पर पूरी मानव जाति का विकास आधारित है – वह गर्भविज्ञान है। व्यक्ति की योग्यता (potential) के सबसे अधिक विकास का काल गर्भकाल है। भारतीय ऋषियों ने गर्भ विज्ञान में बहुत चिरंतन सत्यों की प्राप्ति करी है।

आयुर्वेद की कथा – चतुर्थ भाग – वाग्भट्ट

वाग्भट्ट की गरिमा कलियुग के प्रमुख वैद्य के रूप में प्रदर्शित है। क्योंकि उन्होंने कलियुग में आहार-विहार के नियम-सिद्धांतों का पालन न करने के कारण होने वाले रोगों व उनके निदान पर मुख्य कार्य किया है।

आयुर्वेद की कथा – तृतीय भाग – सुश्रुत संहिता

सबसे पहले शल्य (सर्जरी) की बात महर्षि सुश्रुत ने करी थी। वेदों में जो जो विभाग हैं, उन्हें लेकर सुश्रुत ने एक परंपरा चलाई, जो सुश्रुत संहिता नाम से ग्रथित हुई।

आयुर्वेद की कथा – द्वितीय भाग – चरक संहिता

आयुर्वेद को जानने के लिए वृद्ध-त्रयी का अभ्यास अनिवार्य है – चरक संहिता, सुश्रुत संहिता तथा अष्टांग हृदयम्। इस भाग में जानिए चरक संहिता के बारे में।