Author: Kavita Varma

..अनोखा मोड़..

समन्दर की गहराईयों में रहने वाली एक मछली जिसे बाहर की इस दुनिया के बारे में कुछ भी नही पता, और अचानक उसे कुछ ऐसी शक्ति देकर बाहर भेज दिया जाए जिससे वह बाहर भी रह सकती है, तो उस समय जो उस मछली का अनुभव होगा कुछ ऐसा ही अनुभव मुझे अद्वैत वेदान्त के मास्टर्स कोर्स में प्रवेश मिलने पर मिला। कुछ महीनों पहले जब मैं सामान्य छात्रों की तरह स्कूल में इंटरमीडिएट कर रही थी उस समय मेरे वर्तमान और भविष्य के बीच मे एकदम स्वच्छ, पारदर्शी शीशा था। मेरे पिताजी जो प्रिंटिंग का कार्य करते हैं तथा माँ जो एक सामान्य गृहणी हैं उन दोनों ने मेरे भविष्य की कुछ अलग ही कल्पना की थी। मैने भी उनकी तरह यही सोचा था कि मैं गणित और भौतिक विज्ञान आदि विषयों को आगे भी पढूंगी किन्तु अचानक से कुछ दिन पहले ही मुझे संस्कृत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की प्रेरणा मेरे पथप्रदर्शक गीता परिवार के राष्ट्रिय उपाध्यक्ष डॉ.आशु गोयल जी द्वारा मिली। कुछ दिनों की चर्चा के बाद मैंने भी अपने जीवन …